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Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?

Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?

Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?

शायरी और कविता

‎अभिव्यक्ति और

भावनाएँ

‎साहित्य और संस्कृति

पहचान और जुडाव

‎ युवा भारतीय शायरी और कविता महफ़िलों में जाने का कारण उनके मन की भावनाएँ, उनके विचार, लोग कविता या शायरी से प्रेक्षक के सामने मन मुक्त करते हैं इस कारण हम डिजिटल दुनिया से भी दूर रहते हैं | मोबाइल  के स्क्रिन से न जुडकर  वास्तव में लोगो के आमने सामने रहते थे | आज कल कॉलज में होने वाले कार्यक्रमो में , कॅफे- क्लब और साहित्यक कार्यक्रमों में कविता शायरी की महफ़िलें हो रहीं हैं | महफ़िल में प्रत्यक्ष जाकर जो अनुभव मिलता हैं वह अलग ही होता हैं | सोशल मीडिया से आनंद लेना और प्रत्यक्ष जाकर महफ़िल में आनंद लेना इन दोनों में बहुत अंतर हैं | लोग अभी कविता और शायरी की ओर इतनी खीचे जा रहे हैं कि लोगों का अभी कविता और शायरी सुना ही नहीं लिखना भी बहुत अच्छा लगने लगा हैं | ऐसे ही बहुत से लेखक हैं जिन्होंने अनेक कविता और शायरियां लिखे हैं | प्रवीण तरार, मंजू जाखड़, सियाराम यादव मयंक इन सब रचनाकारों के बहुत से शायरीयां प्रकाशित हुए हैं | उन्होंने बहुत किताबे लिखे हैं |

“साथ में जब तक गरीबी की खिजाएं हैं |
झूठ कहना है वहां सावन बहारें हैं ||
जो कहा सबके चमन को हम खिलयेंगे |
लूटकर पोंधे मयंक अपना खिलाये हैं ||”

 

यह एक बेहतरीन शायरी “दर्द-ए-दिल” के रचनाकार “सियाराम यादव मयंक” इन्होंने लिखी हैं | मयंक जी की गजलों को पढ़कर ऐसा महसूस होता हैं जैसे वे गजल के वास्तविक स्वरूप को सचेतन ढंग से परखें हैं और उसे काव्यमयी भाषा में अभिव्यक्ती दी हैं |

 

खुद का अभिव्यक्ति प्रकट करने का मंच

Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?

‎आज के लोगों को अपने मन में आने वाले विचार, प्रेम और दर्द सबके साथ बाटने के लिए वह शायरी और कविता की महफ़िल ही उनके लिए एक अच्छा मंच हैं |  आज कल के भाग – दौड़  के कारण लोगों के जीवन में बहुत थकान और  तनाव आता हैं , उसे मुक्त करने के लिए कविता और शायरी  सुनना और सुनाना बहुत अच्छा मार्ग हैं | आज कल क्लब – कैफे , कॉलेजेस और साहित्यिक कार्यक्रम में महफ़िले हो रही हैं वहाँ जाकर लोग आनंद उठा रहे हैं, अपने मन की भावनाएँ प्रकट कर रहे हैं |

सोशल मीडिया का प्रभाव

Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?


‎आज कल के युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया पर तो कविता शायरी की महफ़िल दिखाई देती हैं | अलग- अलग प्लॅटफॉर्म से ( युप्युब, इंस्टाग्राम , फेसबुक ) इन सब के मदद से उन्हें कविता और शायरी की महफ़िल दिखती हैं , पर उन्हें प्रत्यक्ष देखने में जो आनंद हे वह पता नहीं हैं | उन्हें मोबाइल के वजह से होने वाला मानसिक थकान या तनाव से दुर होने के लिए वह महफ़िलों के यहाँ खींचें जा रहे हैं | आज कल के लोग महफ़िलों में भी गरीबी, बेरोज़गारी, सामाजिक समस्याएँ , भेदभाव ऐसे आधुनिक विषय पर कविता शायरी करते हैं |



प्रत्यक्ष जुड़ाव और  अनुभव

Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?

‎प्रत्यक्ष जुड़ाव और अनुभव का मतलब हैं , कार्यक्रम में एक दूसरे से जुड़ना और उसे महसूस करना | हमें प्रत्यक्ष उस महफ़िल में जाकर जो आनंद मिलता हैं, वह किसी सोशल प्लेटफॉर्म से नहीं मिलता | जब कोई  कवि या शायर को हम महफ़िल के कार्यक्रम में सुनते हैं | तब उनके शब्द ही नहीं बल्कि उनकी आवाज , उनके हाव-भाव , वहां का माहौल और प्रेक्षकों की प्रतिक्रिया इन सब का हमें अनुभव होता हैं |
‎जो गहराई और भावनाएं हमें ऑनलाइन माध्यम से समझ नहीं आती वह हमें प्रत्यक्ष जुड़ाव से अनुभव होती हैं |


आधुनिक विषय पर कविता या फिर शायरी

Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?

‎महफ़िलों में युवा पीढ़ी आधुनिक विषय पर जैसे की ‘लोगों की वास्तविक जीवनशैली’ कविता या फिर शायरी के माध्यम से बता रहे हैं | आज की युवा पिढ़ी इस युग में आर्थिक दबाव , पढ़ाई की स्पर्धा ,  रिश्ते नाते भंग होना , महिलाओं की सक्षमता , पैसों की हेरा फेरी , पर्यावरण प्रदूषण और सामाजिक अन्याय  ऐसे अनेक विषयों पर कविता और शायरी रच रहे हैं | ऐसे ही लोग अपने जीवन से निगडित भावनाएं कविता और शायरी से व्यक्त करते हैं | आधुनिक विषय पर कविता या फिर शायरी का अनुभव प्रत्यक्ष महफ़िल में जाकर ही होता हैं |

फॅशन और संस्कृति की नई पहचान

 

‎महफ़िलों में फॅशन और संस्कृति की नई पहचान दिखाई देती हैं |फॅशन यह सिर्फ कपडे  या स्टाइल तक ही मर्यादित नहीं हैं , बल्की व्यक्ति की सोच और जीवन शैली को दर्शता हैं |फॅशन ये कविता और शायरी में दिखावा दिखाने वाला रूप नहीं बल्की वह  विचारों को और भावनाओं को दर्शता हैं | सबको पता हैं की महफ़िल यह बरसों से चले आने वाली एक सांस्कृतिक ही एक पहचान हैं | संस्कृती सुख , दुःख , प्रेम , संघर्ष और भावनाओं को अपना आधार बनाती हैं | लोगों को यही फॅशन और संस्कृति की नई पहचान पसंद हैं |

• गजल के नाम और रचनाकार

१) जख्म- ए- बेवफ़ाई , बेवफा जिंदगी , दर्द ए जुदाई – प्रवीण तरार

२) रूह का रिश्ता – मंजू जाखड़

३) दर्द-ए-दिल – सियाराम यादव मयंक

 

Why Are Young Indians Returning to Poetry and Shayari Gatherings?‎ अगर आप कविता लिखते हैं और आपको वह पाठक को तलक पहुंचना हैं तो एक अच्छा प्रकाशक नीलम पब्लिकेशन  जो आपकी कविता  किताब में छाप कर वह किताब प्रकाशित करेंगे | अगर आपको आपकी किताब नीलम पब्लिकेशन के पास छपवानी हैं तो इस नंबर पर संपर्क कीजिए :- 9892153444/https://publication.sahityanama.com/

 

BY – SHRAVANI MOHITE 

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